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तापमान में बढ़ोतरी और क्लाइमेट चेंज के चलते बढ़ सकता है एग्री लोन डिफॉल्ट!

Agri Loan Portfolio: आने वाले वर्षों में तापमान में बढ़ोतरी और क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिम के चलते कृषि के लिए गए लोन में भारी डिफॉल्ट देखने को मिल सकता है. बीसीजी (BCG) के रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक अगले पांच सालों में कृषि क्षेत्र के लिए लिए गए लोन में 30 फीसदी का उछाल देखने को मिल सकता है.
BCG के रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर औसतन तापमान में प्री-इंजस्ट्रियल लेवल से 1.2 डिग्री सेल्सियस का उछाल आया है जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इसके चलते कृषि उत्पादन में भी कमी आ रही है. इसका असर ये हुआ है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान से जो प्रभावित हुए हैं उनकी प्रति व्यक्ति आय में गिरावट देखने को मिली है. शेड्यूल कमर्शियल बैंकों (SCB) द्वारा दिया जाने वाले आधा कर्ज प्रकृति पर निर्भर करता है. ऐसे में प्राकृतिक आपदा के आने पर बैंकों के मुनाफे में कमी आ सकती है.
बीसीजी ने अपने रिपोर्ट में बताया कि 2030 तक भारत के 42 फीसदी जिलों के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी संभव है. ऐसे में अगले पांच सालों में तापमान में बढ़ोतरी से 321 जिले प्रभावित हो सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन का दूसरा पहलू में भी है. देश की ऊर्जा जरूरत को पूरा इससे किया जा सकता हैऔर ये सालाना 150 अरब डॉलर का अवसर भी प्रदान करता है. साल 2070 तक नेट-जीरो गोल हासिल करने के देश के पास फंड का अभाव है जिसे इसके जरिए पूरा किया जा सकता है.
हाल ही में आरबीआई ने अपने रिपोर्ट में बताया कि एग्री ग्रॉस एनपीए रेश्यो सबसे ज्यादा है. कृषि क्षेत्र के लिए ग्रॉस एनपीए रेश्यो 6.2 फीसदी है जबकि सबसे कम ग्रॉस एनपीए रेश्यो रिटेल लोन के 1.2 फीसदी है. हालांकि इसके बावजूद बैंकों को कृषि क्षेत्र के लिए दिए जाने वाले लोन बुक में उछाल भी देखने को मिला है. सेमी-रूरल और ग्रामीण इलाकों में कृषि क्षेत्र के लिए लोन डिमांड में बढ़ोतरी के लिए ऐसा देखा जा रहा है. हालांकि बीसीजी की रिपोर्ट की मानें तो तापमान में बढ़ोतरी और क्लाइमेट चेंज के चलते कृषि क्षेत्र के लोन के डिफॉल्ट में बढ़ोतरी आ सकती है.