किसानवाणी
मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को भी किसानों के समान मिले KCC और सस्ते कर्ज का लाभ!

Union Budget 2025: एक फरवरी 2025 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी. इस बजट में मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों ने भी सरकार के सामने अपने मांगों की फेहरिस्त सौंपी है. मधुमक्खी पालन उद्योग परिसंघ ( Confederation of Apiculture Industry) ने वित्त मंत्री से मधुमक्खी पालकों को भी किसान के रूप में परिभाषित करने को कहा है जिससे उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और सस्ते कर्ज जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके.
मधुमक्खी पालन उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष देवव्रत शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर मधुमक्खी पालकों की आय बढ़ाने को लेकर अपनी मांगें सौंपी है. उन्होंने कहा, मधुमक्खी पालन एग्रीकल्चर इकोसिस्टम का प्रमुख हिस्सा बन चुका है जो कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही हजारों परिवारों को आजीविका प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. देवव्रत शर्मा के मुताबिक, कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाओं को देखते हुए मधुमक्खी पालकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है और इसके लिए मधुमक्खी पालकों को भी किसान के कैटगरी में शामिल किया जाना चाहिए जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें.
1998 में लागू किए गए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधा का विस्तार किया गया और इसके दायरे में मत्स्यपालकों और मवेशीपालकों को भी लाया गया लेकिन मधुमक्खी पालक किसान अभी भी इससे वंचित हैं. देवव्रत शर्मा के मुताबिक, मधुमक्खी पालन में मौसम, प्रतिकूल मौसम में प्रबंधन, बाढ़, आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदा समेत तमाम चुनौतियां रहती हैं और नुकसान होने की स्थिति में मधुमक्खी पालनकों को किसान के रूप में परिभाषित नहीं करने से उन्हें तमाम योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है.
उन्होंने बताया, ‘‘मधुमक्खी पालन में शहद और मोम के अलावा इससे कई ऐसा वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स बनाये जा सकते हैं जिससे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है जिनमें पोलन कलेक्शन, संग्रहण, प्रोपोलिस निकालना, रॉयल जेली निकालना, मधुमक्खी के डंक निकालना, शहद और मोम जैसे कुछ उत्पाद हैं जिनकी कीमत शहद के मुकाबले कई गुना होती है. उन्होंने बताया कि इस चीजों को प्राप्त करने में आधुनिक मशीनरी की आवश्यकता पड़ती है लेकिन कर्ज महंगा होने के चलते किसान इसे खरीद नहीं सकते हैं. ऐसे में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधा से मधुमक्खी पालक किसानों को भी दिया जाना चाहिए.
देवव्रत शर्मा ने बताया कि, किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल के नुकसान के लिए मुआवजा मिलता है, उसी तरह मधुमक्खी पालकों को भी ऐसे जोखिमों के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, वर्तमान में मधुमक्खी पालन उद्योग के लिए कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है. उन्होंने सरकार से मधुमक्खी के छत्तों और कॉलोनियों के लिए डेडीकेटेड बीमा योजना शुरू करने का अनुरोध किया है.