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जूट की खेती से जुड़े 40 लाख किसान परिवार के लिए खुशखबरी…

Jute MSP Hike: जूट की खेती करने वाले किसानों से लेकर इस उद्योग से जुड़े लोगों के सरकार ने बड़ी राहत दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने 2025-26 सीजन के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने पर अपनी मुहर लगा दी है. सरकार के इस फैसले से लाखों की संख्या में पश्चिम बंगाल, बिहार और असम के किसानों को फायदा होगा जो जूट की खेती करते हैं.
जूट के औसत लागत पर मिलेगा 66.8 फीसदी का रिटर्न
22 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. 2025-26 सीज़न के लिए कच्चे जूट (टीडी-3 श्रेणी) का एमएसपी, 5,650/- रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है. एमएसपी में बढ़ोतरी के फैसले से उत्पादन के औसत लागत के ऊपर 66.8 फीसदी का रिटर्न मिलेगा. कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मुल्य में बढ़ोतरी का फैसला आखिल भारतीय स्तर पर औसत लागत से कम से कम 1.5 गुना ज्यादा एमएसपी निर्धारित करने के सिद्धांत के अनुरूप है, जिसकी घोषणा 2018-19 के बजट में की गयी थी.
मोदी काल में 2.35 गुना बढ़ गया कच्चे जूट का एमएसपी
मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए कच्चे जूट का एमएसपी, पिछले मार्केटिंग सीजन 2024-25 की तुलना में 315/- रुपये प्रति क्विंटल अधिक है. भारत सरकार ने कच्चे जूट के एमएसपी को 2014-15 के 2400 /-रुपये क्विंटल से बढ़ाकर 2025-26 के लिए 5,650 /- रुपये प्रति क्विंटल किया है, इस प्रकार पिछले 10 वर्षों में कच्चे जूट के एमएसपी में 3250/- रुपये प्रति क्विंटल (2.35 गुना) की वृद्धि दर्ज की गयी है. 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान जूट उगाने वाले किसानों को भुगतान की गई एमएसपी राशि 1300 करोड़ रुपये रही है जबकि 2004-05 से 2013-14 की अवधि के दौरान, भुगतान की गई रकम केवल 441 करोड़ रुपये थी.
40 लाख किसान परिवार जूट पर निर्भर
देश में करीब 40 लाख किसान परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जूट उद्योग पर निर्भर है. लगभग 4 लाख श्रमिकों को जूट मिलों में और जूट में व्यापार में प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है. पिछले साल जूट की खरीद 1 लाख 70 हजार किसानों से की गई थी. जूट के 82% किसान पश्चिम बंगाल के हैं, जबकि शेष जूट उत्पादन में असम और बिहार दोनों ही की 9% हिस्सेदारी है. जूट कॉरपरेशन ऑफ इंडिया (Jute Corporation of India) केंद्र सरकार के नोडल एजेंसी के रूप में मूल्य समर्थन ऑपरेशंस करना जारी रखेगा और यदि कोई हानि होती है तो हानि की पूरी क्षतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी.