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किसानों के लिए बजट में मोदी सरकार खोलेगी खजाना, KCC को लेकर बड़ा एलान संभव

Union Budget 2025: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आम बजट पेश होने में अब 24 घंटे से भी कम समय रह गया है. देश के किसानों की भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पर निगाहें हैं कि वो किसानों को क्या-क्या सौगात देती हैं. हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था का जो मौजूदा समय में हाल है जब विकास दर की रफ्तार गिरती जा रही है, डिमांड और खपत में कमी आ रही है और उसपर से कमरतोड़ महंगाई तो ये माना जा रहा है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मोदी सरकार किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अपना खजाना खोल सकती है.
46 फीसदी आबादी को कृषि क्षेत्र में रोजगार
भारतीय अर्थव्यवस्था के जीडीपी ग्रोथ रेट में बड़ी गिरावट के बाद जो सम्मानजनक थोड़ी बहुत हालत बची है वो कृषि क्षेत्र ने ही बचाई है जिससे देश में सबसे ज्यादा लोग जुड़े हैं और ये सेक्टर सबसे ज्यादा 46 फीसदी लोगों को रोजगार भी देता है. कृषि क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है. ऐसे में बजट में कृषि क्षेत्र के लिए बजट आवंटन को 15 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. वित्त वर्ष 2025-25 के लिए कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन को बढ़ाकर 1.75 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है. वित्त वर्ष 2024-25 में 1.52 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था.
दालों के उत्पादन में भारत बनेगा आत्मनिर्भर
इस बजट में सरकार कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए ज्यादा फंड का प्रावधान कर सकती है. दलहन और तिलहन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में बड़ी घोषणाएं की जा सकती है. कृषि आधारित एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा दिया जा सकता है जिससे किसानों की आय को बढ़ाया जा सके. दालों की आसमान छूती कीमतों ने सरकार को परेशान कर रखा है. भारत अपने दाल और तेल के खपत के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है.
5 लाख रुपये होगा KCC लिमिट
निर्मला सीतारमण किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लोन लेने की लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती हैं जो फिलहाल 3 लाख रुपये है. बजट में केसीसी के तहत किसानों के लिए क्रेडिट लिमिट को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की योजना है. किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने की मांग लंबे समय से हो रही है. अगर ऐसा हुआ तो किसानों खासकर छोटे व मझोले किसानों का इसका जोरदार भायदा होगा और इसके चलते रूरल डिमांड यानी ग्रामीण मांग में भी इजाफा देखा जा सकता है जिसके जरिए गांवों की अर्थव्यवस्था में भी सुधार देखा जाएगा.
क्या है किसान क्रेडिट कार्ड
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) भारत सरकार की एक योजना है. इसके तहत किसानों को खेती के कामों के लिए समय पर और पर्याप्त उधार दिया जाता है.इस योजना के तहत किसानों को कई तरह के फ़ायदे मिलते हैं. किसान एक ही जगह से कई तरह की कृषि जरूरतों के लिए लोन ले सकते हैं और इसका आवेदन प्रक्रिया भी बेहद सरल है. किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने पर ब्याज दरों में 2 फीसदी की छूट के साथ ही समय से पहले या समय पर लोन चुकाने पर 3 फीसदी क्विक रीपेमेंट इंसेटिव भी दिया जाता है. सरकार किसानों को ब्याज पर 2 फीसदी छूट देती है.इस तरह किसानों को सालाना 4 फीसदी दर से लोन दिया जाता है. किसानों को फसल बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, और परिसंपत्ति बीमा का कवर भी मिलता है.
FPO और सेल्फ हेल्प ग्रुप को मिलेगा बढ़ावा
बजट में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के लिए घोषणाएं संभव है. एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा स्कीम की मियाद को चार से पांच साल आगे बढ़ा सकती है जो इस वित्त वर्ष पर खत्म होने जा रहा है. 2020 में 10,000 एफपीओ के गठन करने की घोषणा की गई थी और 6,865 करोड़ का प्रावधान किया गया था. मार्च 2025 तक 10000 नए एफपीओ बनाने का लक्ष्य था, जिनमें से 9200 अक्टूबर 2024 तक बनाए जा चुके हैं. इन संगठनों को
राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म में इंटीग्रेट करने का भी सुझाव दिया गया है जिससे किसानों को बाजारों तक अपनी पहुंच बढ़ाने और सीमलेस ट्रांजैक्शन करने में मदद मिलेगी.