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मखाना बोर्ड के गठन से कैसे बदल जाएगी बिहार के मिथिलांचल की तस्वीर?

Makhana Board: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आम बजट पेश करते हुए बिहार को बड़ी सौगात देते हुए मखाना बोर्ड के गठन का एलान किया है. वित्त मंत्री के इस एलान को साल के आखिर में बिहार विधानसभा चुनावों के साथ देखा जा रहा है. हालांकि बिहार सरकार लंबे समय से मखाना के पैदावार को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के विशेष पैकेज के साथ मखाना के न्यूनतम समर्थन मुल्य घोषित करने की भी मांग करती रही है.
मखाना बोर्ड के लिए 100 करोड़ आवंटित
वित्त मंत्री सीतारमण ने मखाना बोर्ड के गठन के साथ इसके लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित करने का एलान करते हुए कहा, बिहार के लोगों के लिए एक विशेष अवसर है. प्रदेश में मखाने के उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन के साथ मार्केटिंग में सुधार लाने के लिए मखाना बोर्ड का गठन किया जाएगा. इन गतिविधियों में लगे लोगों को एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) में संगठित किया जाएगा. मखाना बोर्ड किसानों को हर प्रकार की सहायता देते के साथ ट्रेनिंग भी देंगे. उन्होंने कहा कि ये एफपीओ यह सुनिश्चित करेंगे कि इन किसानों को सभी मौजूदा सरकारी योजनाओं का लाभ मिले.
मखाने उत्पादन में लगे किसान होंगे समृद्ध
मखाना बोर्ड गठन के लिए आवंटित रकम से इसकी खेती करने वाले किसानों को फायदा होगा. मोदी सरकार का ये फैसला मखाने की खेती करने वाले किसानों के लिए वरदान बताया जा रहा है. उन्हें मखाना का उत्पादन बढ़ाने में तो मदद मिलेगी ही साथ में मखाने की उचित कीमत भी मिलेगी. बिहार के मिथिलांचल में मखाना की खेती में जोरदार इजाफा होगा. किसानों को मखाना बोर्ड के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर मिलेगा. मखाने से जुड़े फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की इलाके में स्थापना होगी. मखाने के एक्सपोर्ट को प्रोत्साहन मिलेगा और सबसे बड़ी बात मोदी सरकार के इस फैसले से मिथिलांचल का विकास तो होगा ही साथ में इस क्षेत्र में समृद्धि भी आएगी. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के निदेशक इंदू शेखर सिंह के मुताबिक, मधुबनी और दरभंगा की मिट्टी में मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपजाऊ, पौष्टिक और गुणवतापूर्ण है. मखाना के किसानों को एक एकड़ खेत में करीब डेढ़ लाख रुपये तक लाभ संभव है.
मखाने के निर्यात में आएगी तेजी!
बिहार में दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज में सबसे ज्यादा मखाने की खेती की जाती है. दरभंगा में ही 875 सरकारी और गैर सरकारी तालाब से प्रतिवर्ष 7421.4 टन मखाने का उत्पादन किया जाता है और करीब 1.25 लाख परिवार सीधे तौर पर मखाने पर निर्भर हैं. मौजूदा समय में बिहार से मखाने का निर्यात भी किया जाता है. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, इंग्लैंड में मखाने की निर्यात की जाती है. मखाने बोर्ड के गठन से दूसरे देशों में निर्यात के दरवाजे खुलेंगे जिससे विदेशी मुद्रा आएगा. इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी साथ में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत मधुबनी जिला मखाना के लिए चुना गया है.
मिथिला के मखाने को GI टैग
आपको बता दें इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च ने 2020 में एक पेपर जारी किया था जिसके मुताबिक बिहार में 15000 हेक्टेयर में मखाने की खेती होती है लेकिन केवल 10000 टन मखाने का उत्पादन होता है. देश में 90 फीसदी मखाने का उत्पादन बिहार में होता है. असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और ओडिशा में भी मखाने की खेती होती है. नेपाल, बांग्लादेश, चीन जापान और कोरिया में भी मखाने की खेती की जाती है. साल 2022 में मिथिला के मखाने को जीआई टैग से सम्मानित किया गया था.जीआई एक टैग है जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जो एक एक खास भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होते हैं और जिनमें उस क्षेत्र की विशेषता का पता लगता है. जीआई टैग 10 साल की अवधि के लिए वैलिड होता है जिसे रिन्यू किया जा सकता है.